माँ गायत्री की आरती

गायत्री आरती

Gayatri Aarti

गायत्री आरती — माँ गायत्री

आरती लिरिक्स

ॐ जय गायत्री माता, मैया जय गायत्री माता।

सबके पापन को हरो, गोविन्द की दाता॥

ॐ जय गायत्री माता॥

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं।

भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात्॥

चार वेदन की माता, तुम ब्रह्म सनातनी।

गायत्री के रूप में, तुम ज्ञान की दानी॥

ॐ जय गायत्री माता॥

त्रिकाल संध्या तेरी, करूँ प्रतिदिन गाऊँ।

त्रिलोक में तुम व्यापक, चरणों में शीश नवाऊँ॥

ॐ जय गायत्री माता॥

हंस वाहिनी ज्ञानदायिनी, वेद माता।

ॐकारस्वरूपिणी माँ, प्रणव नाद विधाता॥

ॐ जय गायत्री माता॥

ब्रह्ममुहूर्त में जागकर, तेरा ध्यान करूँ मैं।

पंचमुखी माँ गायत्री, प्रणाम करूँ मैं॥

ॐ जय गायत्री माता॥

कुण्डलिनी शक्ति जागत, तेरी कृपा से माता।

जो करे गायत्री जाप, पापन से छूटत जाता॥

ॐ जय गायत्री माता॥

गायत्री माँ की आरती, जो कोई जन गावे।

दुख दरिद्रता मिट जाये, सुख सम्पत्ति पावे॥

ॐ जय गायत्री माता॥

आरती का अर्थ एवं महत्व

गायत्री माता वेदों की माता और ज्ञान की देवी हैं। गायत्री मंत्र "ॐ भूर्भुवः स्वः" सबसे पवित्र वैदिक मंत्र है। यह आरती त्रिकाल संध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में गाई जाती है। गायत्री जयंती और प्रतिदिन पूजा में यह विशेष फलदायी है।

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