माँ काली की आरती
जय काली कलकत्ते वाली
Jai Kali Kalkatte Wali
आरती लिरिक्स
जय काली कलकत्ते वाली, तेरी महिमा न्यारी।
खप्पर वाली खड्ग हाथ में, मुण्ड माला धारी।
जय काली कलकत्ते वाली॥
क्रोध मुखी महाकाली, शुम्भ निशुम्भ संहारी।
रक्तबीज को खत्म किया, तूने असुर संहारी।
जय काली कलकत्ते वाली॥
महिषासुर मर्दिनी माँ, तेरा रूप निराला।
शिव की शक्ति जगत-जननी, तुम ब्रह्मा की बाला।
जय काली कलकत्ते वाली॥
भैंसे पर चढ़ आई माँ, डमरू बजती आई।
संसार में भय मिटा दिया, अमृत बरसाई।
जय काली कलकत्ते वाली॥
मुण्ड-माल गले पहने, काली माँ अलबेली।
लाल जीभ मुख से निकली, नर-मुण्डों की रेली।
जय काली कलकत्ते वाली॥
श्मशान में तू वास करे, शिव तन पर पाँव।
काली माँ का रूप देखकर, काँपे सब असुराव।
जय काली कलकत्ते वाली॥
जो भक्त तेरी शरण में आवे, उसकी विपदा जाये।
काली माता की आरती गाये, मनवांछित फल पाये।
जय काली कलकत्ते वाली॥
आरती का अर्थ एवं महत्व
माँ काली दुर्गा का उग्र रूप हैं। कलकत्ता (कोलकाता) के काली मंदिर में उनकी विशेष पूजा होती है। इस आरती में काली माँ के भयंकर स्वरूप — खप्पर, खड्ग, मुंडमाला — और उनके द्वारा असुरों के संहार का वर्णन है। काली पूजा और दीपावली के अवसर पर यह गाई जाती है।
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