सूर्य पूजा

भगवान सूर्यदेव 30-45 मिनट रविवार, मकर संक्रांति, छठ पर्व, सूर्य ग्रहण शांति

📖 कथा / महत्व

सूर्यदेव कश्यप ऋषि और अदिति के पुत्र हैं, इसलिए उन्हें आदित्य भी कहते हैं। वे प्रत्यक्ष देवता हैं — जिन्हें हम प्रतिदिन देख सकते हैं। सूर्यदेव सभी ग्रहों के राजा और प्राणशक्ति के स्रोत हैं। रामायण में अगस्त्य ऋषि ने श्री राम को रावण से युद्ध पूर्व आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कराया था, जिससे राम को विजय प्राप्त हुई। महाभारत में कर्ण को सूर्य पुत्र कहा गया है — कर्ण के कवच-कुंडल सूर्य का ही वरदान थे।

🗓️ सर्वोत्तम दिन: रविवार (सूर्य का दिन — सर्वोत्तम)मकर संक्रांति (14 जनवरी — सूर्य का उत्तरायण प्रवेश)छठ पर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)रथ सप्तमी (माघ शुक्ल सप्तमी — सूर्य जयंती) ⏱️ 30-45 मिनट (सूर्य नमस्कार सहित), अर्घ्य मात्र 10 मिनट 🟢 शुरुआती

🧘 पूजा से पहले — तैयारी

📋 सामग्री

तांबे का लोटा — 1 (अर्घ्य हेतु, अनिवार्य) लाल चंदन पाउडर — 1 छोटा पैकेट (25 ग्राम) लाल पुष्प (गेंदा, गुड़हल, कमल) — 7-11 गुड़ — 100 ग्राम गेहूं के दाने — 1 मुट्ठी अक्षत (साबुत चावल) — 1 कटोरी धूप बत्ती — 1 पैकेट घी का दीपक — 1 नारियल — 1 (साबुत) लाल वस्त्र — 1 छोटा (सूर्य को अर्पण हेतु) तांबे का सिक्का — 1 कपूर — 5 टुकड़े रोली (लाल टीका) — 1 पैकेट मौली — 1 बंडल गंगाजल — 1 शीशी (जल में मिलाने हेतु) तिल (काले) — 50 ग्राम (मकर संक्रांति पर) गुड़-तिल के लड्डू — 5 (संक्रांति पर) रुई की बत्ती — 5 आरती की थाली — 1 सूर्य यंत्र (वैकल्पिक) — 1 आदित्य हृदय स्तोत्र पुस्तक — 1 शहद — 1 छोटी शीशी (अर्घ्य जल में, वैकल्पिक) केला — 2 मिठाई (सूर्य को भोग) — 100 ग्राम लाल फूल की माला — 1

📝 पूजा विधि — चरण

1

प्रातःकाल स्नान एवं तैयारी (5 मिनट)

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। स्वच्छ लाल या सफेद वस्त्र धारण करें। माथे पर लाल चंदन या रोली का तिलक लगाएं। तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल पुष्प, अक्षत, लाल चंदन डालें।

2

सूर्य दर्शन एवं संकल्प (3 मिनट)

खुले स्थान पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। उगते सूर्य के दर्शन करें। हाथ जोड़कर संकल्प लें — अपना नाम, गोत्र बोलें और सूर्यदेव से आशीर्वाद की प्रार्थना करें।

3

सूर्य अर्घ्य (5 मिनट)

तांबे के लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे जल की धारा सूर्य की दिशा में गिराएं — ध्यान रखें कि जल की धारा के बीच से सूर्य दिखे। "ॐ सूर्याय नमः" या गायत्री मंत्र बोलते हुए अर्घ्य दें। तीन बार अर्घ्य देना उत्तम है।

4

गायत्री मंत्र जाप (5 मिनट)

"ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्" गायत्री मंत्र का कम से कम 11 या 21 बार जाप करें। सूर्य की ओर मुख करके आंखें बंद कर ध्यान से जाप करें।

5

सूर्य के 12 नामों का उच्चारण (3 मिनट)

सूर्य के बारह नाम बोलें — मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सवित्र, अर्क, भास्कर। प्रत्येक नाम के साथ "ॐ" और "नमः" लगाएं। यही नाम सूर्य नमस्कार में भी प्रयोग होते हैं।

6

आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ (10 मिनट)

रविवार या विशेष अवसर पर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। यह स्तोत्र अगस्त्य ऋषि ने भगवान राम को रावण से युद्ध पूर्व दिया था। यदि पूर्ण पाठ संभव न हो तो सूर्य बीज मंत्र "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" का 108 बार जाप करें।

7

भोग अर्पण (3 मिनट)

सूर्यदेव को गुड़, गेहूं, केला और मिठाई का भोग लगाएं। मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ के लड्डू विशेष रूप से अर्पित करें। भोग पूर्व दिशा की ओर मुख करके अर्पित करें। नारियल भी सूर्यदेव को चढ़ाएं।

8

दीप एवं धूप अर्पण (2 मिनट)

घी का दीपक जलाकर सूर्यदेव की दिशा में रखें। धूप बत्ती जलाएं। कपूर जलाकर आरती करें। लाल पुष्प और अक्षत अर्पित करें। यदि सूर्य की मूर्ति या यंत्र हो तो उस पर लाल चंदन का तिलक लगाएं।

9

सूर्य नमस्कार (10 मिनट)

बारह सूर्य नमस्कार (आसन) करें। प्रत्येक आसन पर सूर्य के एक नाम का उच्चारण करें — "ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः..." इत्यादि। शारीरिक अक्षमता हो तो खड़े होकर हाथ जोड़कर ही नमस्कार करें। यह शरीर और मन दोनों के लिए लाभदायक है।

10

परिक्रमा एवं प्रणाम (2 मिनट)

सूर्य की दिशा में तीन बार परिक्रमा करें या तीन बार प्रदक्षिणा करें। साष्टांग प्रणाम करें — पूर्व दिशा की ओर लेटकर प्रणाम करना सर्वोत्तम है। सूर्यदेव से परिवार के स्वास्थ्य और सफलता हेतु प्रार्थना करें।

11

दान एवं सेवा (3 मिनट)

रविवार को गुड़, गेहूं, तांबे का सिक्का या लाल वस्त्र का दान करें। ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराना सूर्य पूजा का विशेष फल देता है। सूर्यदेव दाता हैं — उनकी पूजा में दान का विशेष महत्व है।

12

प्रसाद वितरण (2 मिनट)

गुड़, गेहूं के लड्डू या तिल-गुड़ का प्रसाद परिवार में बांटें। प्रसाद सूर्य की रोशनी में ही वितरित करें। बच्चों को सूर्य प्रणाम सिखाएं — यह संस्कार बचपन से डालना उत्तम है।

📿 मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

तेजस्वी सूर्यदेव को मेरा नमन है।

📿 अन्य मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् (गायत्री मंत्र)

ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् (सूर्य गायत्री)

ॐ घृणि सूर्याय नमः (सूर्य तारक मंत्र — रोग निवारण हेतु विशेष)

⚠️ ये गलतियाँ न करें

✅ पूजा के बाद

✅ लाभ

  • नेत्र रोग एवं अस्थि रोग (हड्डियों की कमजोरी) से मुक्ति — सूर्य की रोशनी विटामिन डी का प्राकृतिक स्रोत है
  • आत्मविश्वास, यश, नेतृत्व क्षमता एवं पद प्राप्ति — सूर्य ज्योतिष में राजा ग्रह हैं, इनकी कृपा से सरकारी नौकरी और उच्च पद मिलता है
  • सूर्य दोष एवं पितृ दोष शांति — कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो अर्घ्य देने से सूर्य बलवान होता है
  • शारीरिक ऊर्जा, स्फूर्ति एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि — नियमित सूर्य नमस्कार से शरीर लचीला और मजबूत बनता है
  • पिता एवं पितृ पक्ष से संबंधों में सुधार — ज्योतिष में सूर्य पिता का कारक ग्रह है, पूजा से पितृ आशीर्वाद मिलता है

❓ FAQ

सूर्य को जल क्यों चढ़ाते हैं?

सूर्य को जल अर्पित करने से सूर्य की किरणें जल की धारा से होकर शरीर पर पड़ती हैं जो स्वास्थ्य लाभ देती हैं। ज्योतिष में अर्घ्य से सूर्य ग्रह बलवान होता है और कुंडली में सूर्य संबंधी दोष दूर होते हैं।

तांबे के लोटे से ही अर्घ्य क्यों देना चाहिए?

तांबा सूर्य की धातु माना जाता है। ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह की एक धातु होती है। तांबे के बर्तन से जल देने पर सूर्य ग्रह विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। स्टील या प्लास्टिक से अर्घ्य देना शास्त्रसम्मत नहीं है।

क्या महिलाएं सूर्य अर्घ्य दे सकती हैं?

हां, महिलाएं पूर्ण रूप से सूर्य अर्घ्य दे सकती हैं। छठ पर्व में तो महिलाएं ही मुख्य व्रती होती हैं। गायत्री मंत्र जाप भी महिलाओं के लिए पूर्णतः शुभ और अनुमत है।

सूर्य ग्रहण के दिन क्या करें?

सूर्य ग्रहण के समय अर्घ्य न दें, सूर्य दर्शन न करें और भोजन न पकाएं। ग्रहण काल में मंत्र जाप करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके सूर्य को अर्घ्य दें और दान करें।

सूर्य नमस्कार कितने करने चाहिए?

आदर्श रूप से 12 सूर्य नमस्कार (प्रत्येक सूर्य नाम पर एक) करें। शुरुआत में 3-5 से आरंभ करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। शारीरिक समस्या हो तो खड़े होकर हाथ जोड़कर सूर्य को नमन करना भी पर्याप्त है।

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