लक्ष्मी पूजा

देवी लक्ष्मी 1-2 घंटे दीपावली, शुक्रवार, कोजागरी पूर्णिमा

📖 कथा / महत्व

देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं। जब देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीर सागर का मंथन किया, तो 14 रत्नों में से एक लक्ष्मी जी प्रकट हुईं। उन्होंने भगवान विष्णु को वर के रूप में चुना और उनकी पत्नी बनीं। दीपावली पर लक्ष्मी पूजा की परंपरा इसलिए है क्योंकि इस दिन लक्ष्मी जी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशित घरों में निवास करती हैं। जो घर अंधेरे और गंदे हों, वहां अलक्ष्मी (दरिद्रता) का वास होता है।

🗓️ सर्वोत्तम दिन: दीपावली की रात — स्थिर लग्न में प्रदोष काल (सर्वश्रेष्ठ)शुक्रवार (लक्ष्मी जी का विशेष दिन — नित्य पूजा हेतु)कोजागरी पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा — आश्विन मास)धनतेरस (दीपावली से दो दिन पहले)अक्षय तृतीया, दशहरा और होली के बाद का पहला शुक्रवार ⏱️ 1.5-2 घंटे (तैयारी एवं दीपदान सहित 3-4 घंटे) 🟢 शुरुआती

🧘 पूजा से पहले — तैयारी

📋 सामग्री

लक्ष्मी-गणेश मूर्ति (मिट्टी या चांदी — जोड़ी में, अलग-अलग नहीं) कमल पुष्प (यदि उपलब्ध हों) या गुलाबी/लाल गुलाब (11-21) अक्षत — हल्दी मिले साबुत चावल (200 ग्राम) हल्दी पाउडर (50 ग्राम) और कुमकुम/सिंदूर (25 ग्राम) सोने या चांदी के सिक्के (या सोने-चांदी की कोई भी वस्तु जैसे अंगूठी, चेन) लौंग (11) और इलायची (11) गुड़ (100 ग्राम) और साबुत धनिया (50 ग्राम) शुद्ध घी (200 मिली — दीपक और प्रसाद हेतु) और सरसों का तेल (दीपक हेतु) खील-बताशे (250 ग्राम — लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय) लाल या गुलाबी वस्त्र — चौकी हेतु (1 मीटर) और लक्ष्मी जी को अर्पित करने हेतु (लाल चुनरी) कलश (तांबे या पीतल का) और साबुत नारियल आम के पत्ते (5 — कलश हेतु) मिट्टी के दीपक/दीये (21-51 — घर भर में जलाने हेतु) रुई की बत्ती (50 — दीपकों हेतु) कपूर (15-20 टुकड़े — आरती हेतु) मौली/कलावा (1 रोल) सुपारी (5) और पान के पत्ते (5) चंदन पाउडर या इत्र (25 ग्राम) मौसमी फल (5 प्रकार) और मिठाई (बर्फी, पेड़ा — 250 ग्राम) श्रृंगार सामग्री — बिंदी, चूड़ी, काजल, मेहंदी, लाल चुनरी (सुहाग सामग्री) धूप बत्ती या अगरबत्ती (1 पैकेट) नया बही-खाता और लाल कलम (व्यापारियों हेतु) तिजोरी की चाबी या बटुआ (पूजा में रखने हेतु) जल का लोटा (तांबे का) रंगोली सामग्री (रंगीन पाउडर या फूलों की पंखुड़ियां)

📝 पूजा विधि — चरण

1

चौकी सजाना एवं रंगोली (10 मिनट)

चौकी या ऊंचे स्थान पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाएं। चौकी के सामने फर्श पर सुंदर रंगोली बनाएं — कमल, स्वस्तिक या लक्ष्मी जी के पदचिह्न बनाएं। चौकी पर चावल (अक्षत) का ढेर (पुंज) बनाएं जिस पर मूर्ति रखेंगे। दीपदान के दीये तैयार करें — रुई की बत्ती बनाकर सरसों तेल या घी में रखें।

2

कलश स्थापना (5 मिनट)

कलश में जल भरें, उसमें सुपारी, इलायची, सिक्का, हल्दी और अक्षत डालें। कलश पर 5 आम के पत्ते और ऊपर नारियल रखें। मौली बांधें। कलश चौकी के बगल में रखें। कलश में गंगाजल डालना विशेष शुभ है। यह कलश भगवान वरुण और देवी लक्ष्मी दोनों का प्रतीक है।

3

गणेश पूजन (10 मिनट)

लक्ष्मी पूजा में सबसे पहले गणेश जी का पूजन अनिवार्य है। गणेश मूर्ति (या सुपारी पर सिंदूर लगाकर) को सिंदूर, दूर्वा, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। "ॐ गं गणपतये नमः" 11 बार बोलें। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं — उनकी कृपा से पूजा निर्विघ्न संपन्न होती है।

4

लक्ष्मी जी का आवाहन एवं स्थापना (5 मिनट)

लक्ष्मी जी की मूर्ति या तस्वीर को अक्षत के पुंज पर स्थापित करें। "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः, आवाहयामि" बोलकर पुष्प और अक्षत अर्पित करें। सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण और तिजोरी की चाबी मूर्ति के समीप रखें। व्यापारी नया बही-खाता भी पूजा स्थल पर रखें।

5

पंचामृत स्नान एवं श्रृंगार (10 मिनट)

लक्ष्मी जी की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं। फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं। मूर्ति पोंछकर श्रृंगार करें — हल्दी-कुमकुम लगाएं, सिंदूर लगाएं, बिंदी लगाएं, लाल चुनरी ओढ़ाएं। चंदन का टीका लगाएं। लक्ष्मी जी श्रृंगार से अत्यंत प्रसन्न होती हैं।

6

षोडशोपचार पूजन (15 मिनट)

लक्ष्मी जी को 16 उपचारों से पूजें — आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, चंदन, पुष्प (विशेषकर कमल या गुलाब), धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, फल, दक्षिणा, प्रणाम। घर पर जो उपलब्ध हो वही अर्पित करें। "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" प्रत्येक उपचार के साथ बोलें।

7

नैवेद्य — खील-बताशे एवं भोग (5 मिनट)

खील-बताशे लक्ष्मी जी का प्रमुख प्रसाद है — इसे अवश्य अर्पित करें। गुड़-धनिया, मिठाई (बर्फी, पेड़ा), फल भी भोग लगाएं। लौंग-इलायची रखें। नैवेद्य अर्पित करते समय "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः, नैवेद्यं समर्पयामि" बोलें। पानी का आचमन दें।

8

लक्ष्मी जी का मंत्र जाप (10 मिनट)

"ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का 108 बार जाप करें। माला (तुलसी या कमलगट्टे की) हो तो उपयोग करें, नहीं तो उंगलियों पर गिनें। जाप के समय आंखें बंद रखें और लक्ष्मी जी का स्वरूप ध्यान करें — कमल पर विराजमान, स्वर्ण वर्ण, चार भुजाएं, अभय और वरद मुद्रा।

9

आरती (5 मिनट)

"ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता, तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता..." पूरी आरती गाएं। कपूर या घी की बत्ती से आरती करें। घंटी बजाएं। परिवार के सभी सदस्य साथ में गाएं। आरती के बाद सभी हाथ आरती की ज्योत पर रखकर अपने मस्तक पर लगाएं।

10

पुष्पांजलि एवं प्रार्थना (3 मिनट)

दोनों हाथों में पुष्प और अक्षत लेकर लक्ष्मी जी को अर्पित करें। क्षमा प्रार्थना बोलें। फिर अपनी मनोकामना मन में या बोलकर लक्ष्मी जी से कहें। प्रार्थना सच्चे मन से करें — केवल धन नहीं, सुख, स्वास्थ्य और परिवार की भलाई भी मांगें।

11

दीपदान — पूरे घर में दीये जलाना (15 मिनट)

यह दीपावली की लक्ष्मी पूजा का सबसे सुंदर भाग है। घर के हर कमरे, कोने, द्वार, खिड़की, बालकनी, सीढ़ी और तुलसी के पौधे के पास दीये जलाएं। रसोई, तिजोरी और शौचालय के बाहर भी दीपक रखें। अंधेरा कहीं न रहे — लक्ष्मी प्रकाश में निवास करती हैं, अलक्ष्मी (दरिद्रता) अंधेरे में।

12

प्रसाद वितरण एवं समापन (5 मिनट)

खील-बताशे, मिठाई और फल का प्रसाद सभी परिवारजनों में बांटें। पड़ोसियों को भी मिठाई और प्रसाद दें। दीपावली पर दान का विशेष महत्व है — गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दक्षिणा दें। लक्ष्मी जी दान देने वालों पर विशेष कृपा करती हैं।

📿 मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

"श्रीं" लक्ष्मी जी का बीज मंत्र है जो धन, सौभाग्य और ऐश्वर्य का प्रतीक है। इस मंत्र का अर्थ है — महालक्ष्मी देवी को मेरा नमस्कार।

📿 अन्य मंत्र

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥ (लक्ष्मी गायत्री मंत्र)

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥

ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः

⚠️ ये गलतियाँ न करें

✅ पूजा के बाद

✅ लाभ

  • धन, समृद्धि एवं भौतिक ऐश्वर्य की प्राप्ति — आर्थिक तंगी दूर होती है
  • ऋण (कर्ज) से मुक्ति और बचत में वृद्धि
  • गृह में सुख-शांति, दांपत्य जीवन में प्रेम और पारिवारिक सामंजस्य
  • व्यापार में उन्नति, नौकरी में पदोन्नति और नए अवसरों की प्राप्ति
  • सौभाग्य एवं सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि — लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति का यश चारों दिशाओं में फैलता है

❓ FAQ

लक्ष्मी पूजा किस समय करनी चाहिए?

दीपावली पर प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद — लगभग शाम 6-8 बजे) में स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में पूजा करना सर्वोत्तम है। स्थिर लग्न में पूजा करने से लक्ष्मी स्थिर रहती हैं अर्थात धन टिकता है। पंचांग या किसी विश्वसनीय ज्योतिष ऐप से मुहूर्त देख सकते हैं।

क्या लक्ष्मी पूजा में बही-खाता रखना आवश्यक है?

व्यापारी वर्ग (वैश्य समुदाय) में नए बही-खाते को लक्ष्मी पूजा में रखकर "शुभ-लाभ" लिखने की प्राचीन परंपरा है। यह अनिवार्य नहीं पर अत्यंत शुभ है। आजकल व्यापारी लैपटॉप, कैश बॉक्स, चेक बुक भी पूजा में रखते हैं।

क्या महिलाएं लक्ष्मी पूजा कर सकती हैं?

बिल्कुल हां। लक्ष्मी जी स्वयं स्त्री देवता हैं। महिलाएं पूर्ण विधि से लक्ष्मी पूजा कर सकती हैं। वास्तव में कई परंपराओं में गृहलक्ष्मी (घर की स्त्री) द्वारा पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है।

क्या बिना पंडित के घर पर लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं?

हां, लक्ष्मी पूजा घर पर स्वयं की जा सकती है। मूर्ति स्थापित करें, श्रृंगार करें, खील-बताशे का भोग लगाएं, "ॐ जय लक्ष्मी माता" आरती गाएं और पूरे घर में दीये जलाएं। सच्ची भक्ति से की गई सरल पूजा भी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करती है।

पूजा में कोई गलती हो जाए तो क्या करें?

लक्ष्मी जी अत्यंत कृपालु हैं। यदि कोई मंत्र गलत हो जाए या सामग्री भूल जाएं तो चिंता न करें। पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना करें — "मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं महेश्वरि, यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे।" भगवती भाव देखती हैं, विधि नहीं।

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