शिव पूजा

भगवान शिव 1-2 घंटे सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण मास

📖 कथा / महत्व

भगवान शिव त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में संहारक देवता हैं, परंतु वे सबसे सरल और भोले देवता भी हैं — इसीलिए उन्हें "भोलेनाथ" कहते हैं। शिवलिंग की पूजा की परंपरा तब से है जब ब्रह्मा और विष्णु ने शिव के अंतहीन ज्योतिर्लिंग का आदि-अंत खोजने की होड़ लगाई। कोई भी सफल नहीं हुआ, तब दोनों ने शिव की महिमा स्वीकार की। शिव जी को प्रसन्न करना सबसे सरल है — केवल सच्चे मन से जल और बेलपत्र चढ़ाने मात्र से वे प्रसन्न हो जाते हैं।

🗓️ सर्वोत्तम दिन: सोमवार (शिव जी का विशेष दिन — सर्वश्रेष्ठ)महाशिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण शिव पर्व)श्रावण मास (सावन — पूरा महीना शिव पूजा हेतु उत्तम)प्रदोष व्रत (त्रयोदशी तिथि — प्रत्येक पक्ष में)मासिक शिवरात्रि (प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष चतुर्दशी) ⏱️ 45-90 मिनट (सरल पूजा 30 मिनट, विस्तृत पूजा 2 घंटे) 🟢 शुरुआती

🧘 पूजा से पहले — तैयारी

📋 सामग्री

शिवलिंग — पारद (सर्वोत्तम), नर्मदेश्वर (बाण लिंग), स्फटिक, पाषाण, या मिट्टी का बेलपत्र — 11 या 21 तीन पत्ती वाले (बिना कटे-फटे, ताजे) भांग के पत्ते (5-7) — यदि उपलब्ध हों (वैकल्पिक) धतूरे का फल और फूल (2-3) — यदि उपलब्ध हों (वैकल्पिक) गाय का दूध — कच्चा, ताजा (250 मिली — अभिषेक हेतु) गंगाजल या शुद्ध जल (500 मिली — अभिषेक हेतु, तांबे के लोटे में) भस्म/विभूति (50 ग्राम — शिवलिंग और स्वयं माथे पर लगाने हेतु) चंदन पाउडर या चंदन का लेप (25 ग्राम) श्वेत पुष्प — आक (मदार) के फूल, श्वेत कमल, धतूरे के फूल (मुट्ठी भर) श्वेत वस्त्र (आधा मीटर — शिवलिंग पर अर्पित करने हेतु) दही (50 ग्राम), घी (2 चम्मच), शहद (2 चम्मच), शक्कर (2 चम्मच) — पंचामृत हेतु धूप बत्ती — चंदन या गुग्गुल की (1 पैकेट) दीपक एवं घी या तिल का तेल (50 मिली) रुई की बत्ती (5-7) कपूर (10 टुकड़े — आरती हेतु) अक्षत — साबुत चावल (50 ग्राम, बिना हल्दी के — शिव पूजा में सादे चावल) मौली/कलावा (1 रोल) रुद्राक्ष माला (यदि उपलब्ध हो — जाप हेतु) जल की लोटा या कलश (तांबे का) काले तिल (25 ग्राम — शनि दोष शांति हेतु, वैकल्पिक) शहद (50 मिली — अलग से अभिषेक हेतु) गन्ने का रस या गुड़ का जल (100 मिली — अभिषेक हेतु, वैकल्पिक)

📝 पूजा विधि — चरण

1

ध्यान एवं शिव स्मरण (5 मिनट)

आसन पर बैठकर आंखें बंद करें। भगवान शिव का ध्यान करें — कैलाश पर्वत पर विराजमान, जटाओं में गंगा, गले में सर्प, त्रिशूल-डमरू धारी, नंदी वाहन। तीन बार गहरी सांस लें और "ॐ नमः शिवाय" का मानसिक जाप करें। मन को एकाग्र करें।

2

जलाभिषेक (5 मिनट)

तांबे के लोटे में गंगाजल या शुद्ध जल लेकर "ॐ नमः शिवाय" बोलते हुए शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाएं। जल एक धारा में डालें, छिड़कें नहीं। जल शिवलिंग के ऊपरी भाग पर डालें ताकि वह जलहरी से होकर बहे। अभिषेक के समय ध्यान रखें कि जलहरी की ओर पैर न हों।

3

दुग्धाभिषेक (5 मिनट)

ताजे कच्चे दूध से शिवलिंग पर अभिषेक करें। "ॐ नमः शिवाय" का जाप जारी रखें। दूध धीरे-धीरे एक धारा में डालें। दूध शिवलिंग की शीतलता बढ़ाता है और महादेव को अत्यंत प्रिय है। श्रावण मास में दुग्धाभिषेक का विशेष महत्व है।

4

पंचामृत अभिषेक (5 मिनट)

क्रमशः दही, घी, शहद, शक्कर और दूध — इन पांच अमृतों से अभिषेक करें। प्रत्येक द्रव्य अलग-अलग डालें, मिलाकर नहीं। प्रत्येक अभिषेक के बाद शुद्ध जल से शिवलिंग को धोएं। पंचामृत का जल (चरणामृत) प्रसाद रूप में सभी भक्तों को दें — यह अत्यंत पवित्र माना जाता है।

5

भस्म एवं चंदन लेपन (3 मिनट)

शिवलिंग को सूखे कपड़े से हल्के से पोंछें। फिर भस्म (विभूति) की तीन रेखाएं (त्रिपुंड) शिवलिंग पर लगाएं। चंदन का लेप लगाएं। भस्म शिव जी का प्रतीक है — यह वैराग्य और नश्वरता का बोध कराती है। अपने माथे पर भी भस्म का त्रिपुंड लगाएं।

6

वस्त्र एवं जनेऊ अर्पण (2 मिनट)

शिवलिंग पर श्वेत वस्त्र (छोटा कपड़ा) अर्पित करें। यदि जनेऊ (यज्ञोपवीत) हो तो शिवलिंग पर चढ़ाएं। मौली (कलावा) भी शिवलिंग पर बांध सकते हैं। शिव जी को श्वेत या भगवा रंग प्रिय है।

7

बेलपत्र एवं पुष्प अर्पण (5 मिनट)

यह शिव पूजा का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। बेलपत्र को उल्टा (चिकनी सतह ऊपर, डंठल शिवलिंग की ओर) करके चढ़ाएं। "ॐ नमः शिवाय" बोलते हुए एक-एक बेलपत्र अर्पित करें। फिर आक (मदार) के श्वेत फूल, धतूरे के फूल या श्वेत कमल चढ़ाएं। बेलपत्र शिव जी को इतना प्रिय है कि केवल बेलपत्र और जल चढ़ाने से ही शिव प्रसन्न हो जाते हैं।

8

धूप एवं दीप (3 मिनट)

चंदन या गुग्गुल की धूप जलाकर शिवलिंग को दिखाएं। घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं। दीपक शिवलिंग के बाईं ओर (उत्तर-पूर्व में) रखें। शिव पूजा में तिल के तेल का दीपक विशेष शुभ माना जाता है।

9

नैवेद्य — भोग अर्पण (3 मिनट)

शिव जी को भांग, धतूरे का फल, दूध, मिठाई और फल का भोग लगाएं। पान-सुपारी भी अर्पित करें। "ॐ नमः शिवाय, नैवेद्यं समर्पयामि" बोलें। शिव जी सरल देवता हैं — वे केवल जल और बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए जो उपलब्ध हो वही भोग लगाएं।

10

मंत्र जाप (10-15 मिनट)

"ॐ नमः शिवाय" (पंचाक्षर मंत्र) का 108 बार जाप करें। रुद्राक्ष माला हो तो उत्तम, नहीं तो उंगलियों पर गिनें। जाप के समय आंखें बंद रखें और शिव का ध्यान करें। यदि अधिक समय हो तो महामृत्युंजय मंत्र का भी 11 या 108 बार जाप करें। श्रावण में जाप का फल कई गुना बढ़ जाता है।

11

आरती (5 मिनट)

"ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा, ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा..." पूरी आरती गाएं। कपूर या घी की बत्ती से आरती करें। घंटी बजाएं। आरती की थाली शिवलिंग के सामने घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएं।

12

अर्ध परिक्रमा एवं प्रणाम (3 मिनट)

शिवलिंग की अर्ध (आधी) परिक्रमा करें — जलहरी (जल निकलने का मार्ग) तक जाकर वापस आएं। पूर्ण परिक्रमा न करें क्योंकि जलहरी को लांघना वर्जित है। शिवलिंग के सामने साष्टांग प्रणाम करें। "हर हर महादेव" बोलकर विदा लें। शिव जी का चरणामृत (अभिषेक का जल) सभी को वितरित करें।

📿 मंत्र

ॐ नमः शिवाय

यह पंचाक्षर (पांच अक्षरों का) मंत्र है — न, मः, शि, वा, य — जो पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतीक है। इसका अर्थ है — कल्याणकारी भगवान शिव को मेरा नमस्कार। यह सबसे सरल और शक्तिशाली शिव मंत्र है।

📿 अन्य मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ (महामृत्युंजय मंत्र)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ (शिव गायत्री मंत्र)

⚠️ ये गलतियाँ न करें

✅ पूजा के बाद

✅ लाभ

  • पापों का नाश, कर्मों का शुद्धिकरण और मोक्ष (मुक्ति) की प्राप्ति
  • रोग, शोक और भय से मुक्ति — विशेषकर महामृत्युंजय जाप से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है
  • वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और स्थिरता — कुंवारी कन्याओं को उत्तम वर प्राप्ति (सोमवार व्रत)
  • मानसिक शांति, ध्यान शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति — शिव ध्यान से मन की चंचलता दूर होती है
  • शनि, राहु-केतु और काल सर्प दोष शांति — शिव पूजा ज्योतिषीय दोषों के निवारण में अत्यंत प्रभावी है

❓ FAQ

शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा क्यों नहीं करते?

शिवलिंग पर चढ़ा जल जलहरी (सोमसूत्र) से बहता है। इस जल को शिव का वीर्य माना जाता है और जलहरी को लांघना अत्यंत अशुभ है। इसलिए शिवलिंग की अर्ध चंद्राकार (आधी) परिक्रमा करते हैं — एक ओर से जाकर जलहरी तक पहुंचें और वापस उसी ओर से लौटें।

शिव पूजा में तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?

पौराणिक कथा के अनुसार तुलसी (वृंदा) जो जालंधर असुर की पत्नी थी, उसके सतीत्व को भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण किया। जब सत्य पता चला तो वृंदा ने शिव जी को श्राप दिया। तभी से तुलसी शिव पूजा में वर्जित है। बेलपत्र, दूर्वा, आक और धतूरा चढ़ाएं।

क्या महिलाएं शिवलिंग पर जल चढ़ा सकती हैं?

हां, महिलाएं पूर्ण रूप से शिव पूजा कर सकती हैं। वे शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र सब चढ़ा सकती हैं। कुछ परंपराओं में कहा जाता है कि महिलाएं शिवलिंग को स्पर्श न करें, परंतु यह शास्त्रसम्मत नहीं है। देवी पार्वती स्वयं शिव की अर्धांगिनी हैं।

क्या बिना पंडित के घर पर शिव पूजा कर सकते हैं?

शिव सबसे सरल देवता हैं — उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी पंडित की आवश्यकता नहीं। एक लोटा जल और एक बेलपत्र "ॐ नमः शिवाय" बोलकर चढ़ा दें — भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं। शिव जी भाव के भूखे हैं, विधि-विधान के नहीं।

पूजा में कोई गलती हो जाए तो क्या करें?

शिव जी को "आशुतोष" (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) कहते हैं। वे भूल-चूक क्षमा करते हैं। पूजा के अंत में "ॐ नमः शिवाय, अपराधं क्षमस्व" बोलकर प्रणाम करें। एक कथा है कि एक शिकारी ने अनजाने में बेलपत्र शिवलिंग पर गिरा दिए और शिव जी प्रसन्न हो गए — यही उनकी सरलता है।

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