कामिका एकादशी व्रत कथा

Kamika Ekadashi Vrat Katha

भगवान विष्णु श्रावण कृष्ण पक्ष एकादशी
📖

संक्षिप्त उत्तर

कामिका एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। "कामिका" का अर्थ है मनोकामना पूर्ण करने वाली। यह एकादशी समस्त इच्छाओं की पूर्ति और पापों के नाश के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। इस दिन तुलसी दल से विष्णु पूजन का विशेष महत्व है।

कामिका एकादशी व्रत कथा — संपूर्ण कथा

प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था जो अत्यंत विद्वान और धर्मपरायण था। परंतु दुर्भाग्य से एक बार उससे अनजाने में एक गंभीर पाप हो गया। उसने एक निर्दोष व्यक्ति के विरुद्ध झूठी गवाही दी जिसके कारण उस व्यक्ति को भारी दंड भुगतना पड़ा। इस पाप के बोझ से ब्राह्मण अत्यंत दुखी और व्याकुल रहने लगा।

ब्राह्मण के जीवन में दुःख और विपत्तियों की बाढ़ आ गई। उसका स्वास्थ्य गिरने लगा, घर में कलह बढ़ गई और धन का नाश होने लगा। वह समझ गया कि यह सब उसके पापकर्म का फल है। पश्चात्ताप से भरा ब्राह्मण प्रायश्चित्त की खोज में निकल पड़ा।

भटकते हुए वह ब्राह्मण एक वन में एक परम तपस्वी महात्मा के पास पहुँचा। उसने महात्मा को अपना संपूर्ण वृत्तांत सुनाया और पापमुक्ति का उपाय पूछा। महात्मा ने ध्यानपूर्वक सुनकर कहा — "हे विप्र! तुम्हारा पाप गंभीर है, परंतु भगवान विष्णु की कृपा से कोई भी पाप अक्षम्य नहीं है।"

महात्मा ने कहा — "श्रावण कृष्ण पक्ष में कामिका एकादशी आती है। यह एकादशी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति और पापों के क्षय के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस दिन तुलसी दल से भगवान विष्णु का पूजन करो। तुलसी दल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इसके अर्पण से कोटि पुण्य प्राप्त होता है।"

ब्राह्मण ने पूर्ण श्रद्धा से कामिका एकादशी का व्रत रखा। उसने दशमी को एक समय भोजन किया और एकादशी को निराहार रहकर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की। तुलसी के पत्ते, पुष्प और जल से भगवान का अभिषेक किया। दिन-रात विष्णु नाम का जाप करता रहा।

द्वादशी को उसने ब्राह्मणों को भोजन कराकर पारण किया। व्रत के प्रभाव से उसके समस्त पाप नष्ट हो गए। उसके जीवन में पुनः सुख-शांति और समृद्धि लौट आई। उसका स्वास्थ्य ठीक हुआ और परिवार में प्रेम बढ़ा।

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा — "हे राजन! कामिका एकादशी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली है। इस दिन जो तुलसी दल से मेरा पूजन करता है, उसे मैं अपना परम प्रिय भक्त मानता हूँ। तुलसी के एक पत्ते का अर्पण सहस्रों स्वर्ण मुद्राओं के दान से भी बढ़कर है।"

संदर्भ: कामिका एकादशी की कथा ब्रह्म वैवर्त पुराण में वर्णित है। भगवान श्रीकृष्ण ने यह कथा युधिष्ठिर को सुनाई थी।

🔊

ऑडियो कथा सुनें

श्रावण कृष्ण पक्ष को भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें?

1

दशमी को तैयारी और संकल्प

दशमी तिथि को एक समय सात्विक भोजन करें। तुलसी के पौधे की विशेष सेवा करें — उसमें जल दें और दीपक जलाएं। संध्या काल में व्रत का संकल्प लें।

2

प्रातःकाल स्नान और पूजन

एकादशी को प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष बैठें। तुलसी दल से पूजन करें — यह इस एकादशी का सबसे महत्वपूर्ण अंग है।

3

तुलसी दल से विशेष पूजन

भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें। प्रत्येक तुलसी पत्ते पर चंदन लगाकर भगवान के चरणों में रखें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र के साथ प्रत्येक पत्ता अर्पित करें।

4

दिन भर का आचरण

संपूर्ण दिन भगवान विष्णु का नाम स्मरण करें। विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें। तुलसी माला से जाप करना विशेष शुभ है। संध्या काल में पुनः पूजन करें।

5

द्वादशी पारण

द्वादशी को प्रातःकाल तुलसी जल पीकर व्रत खोलें। ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दें। तुलसी का पौधा दान करना इस एकादशी पर अत्यंत पुण्यदायी है।

कामिका एकादशी व्रत कथा में क्या सामग्री चाहिए?

भगवान विष्णु की मूर्ति या शालिग्राम तुलसी दल (अधिक मात्रा में — प्रमुख सामग्री) तुलसी माला चंदन और कुमकुम पीले पुष्प पंचामृत घी का दीपक धूप और अगरबत्ती फल और नैवेद्य गंगाजल

📿 मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

सर्वव्यापी भगवान वासुदेव को नमस्कार। यह मंत्र समस्त कामनाओं की पूर्ति और पापों के क्षय हेतु अत्यंत प्रभावशाली है।

📿 अन्य मंत्र

ॐ तुलस्यै नमः

ॐ विष्णवे नमः

ॐ नमो नारायणाय

कामिका एकादशी व्रत कथा के नियम

  • दशमी से ही तुलसी सेवा आरंभ करें
  • एकादशी को अन्न का त्याग करें
  • पूजन में तुलसी दल का प्रयोग अवश्य करें
  • असत्य बोलने से बचें — यह इस व्रत का विशेष नियम है
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • तामसिक भोजन से दूर रहें
  • दूसरों की निंदा और चुगली न करें

✅ क्या खाएं

  • फल — केला, सेब, पपीता, अनार
  • साबूदाना की खिचड़ी या खीर
  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे के व्यंजन
  • सेंधा नमक की सब्जियाँ (आलू, कद्दू)
  • दूध, दही, मक्खन
  • मेवे और मखाने
  • शकरकंद

❌ क्या न खाएं

  • चावल और अनाज
  • गेहूँ, जौ आदि
  • दालें और फलियाँ
  • प्याज, लहसुन, हींग
  • मांसाहार और अंडे
  • मद्य और तम्बाकू
  • साधारण नमक

कामिका एकादशी व्रत कथा के लाभ

  • समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है
  • झूठी गवाही और वाणी के पापों का नाश होता है
  • तुलसी दल अर्पण से कोटि पुण्य प्राप्त होता है
  • स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है
  • भगवान विष्णु के परम प्रिय भक्त बनते हैं
  • धन-समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कामिका एकादशी पर तुलसी दल का इतना महत्व क्यों है?

तुलसी भगवान विष्णु को सर्वाधिक प्रिय है। कामिका एकादशी पर तुलसी दल से पूजन करने पर सहस्रों स्वर्ण मुद्राओं के दान से भी अधिक पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन तुलसी पत्र पर चंदन लगाकर भगवान को अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कामिका एकादशी कब आती है?

कामिका एकादशी प्रतिवर्ष श्रावण मास के कृष्ण पक्ष (अमावस्या से पूर्ण चंद्र की ओर) की एकादशी तिथि को आती है। यह सावन के महीने में आने वाली पहली एकादशी है।

क्या कामिका एकादशी चातुर्मास में आती है?

हाँ, कामिका एकादशी चातुर्मास काल में आती है। चातुर्मास में किए गए व्रत और पूजन का फल शतगुणा होता है, इसलिए इस एकादशी का पुण्य और भी अधिक बढ़ जाता है।

कामिका एकादशी पर क्या दान करना चाहिए?

इस दिन तुलसी का पौधा दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त अन्नदान, वस्त्रदान और ब्राह्मण भोजन भी पुण्यदायी है।

🙏 यह व्रत कथा परिवार और मित्रों के साथ शेयर करें — पुण्य प्राप्त करें

WhatsApp शेयर

और व्रत कथाएं पढ़ें

🪔 सभी व्रत कथाएं देखें

और जानें

व्रत की याद और पूजा विधि चाहिए?

कुल पुरोहित AI — हर व्रत से एक दिन पहले अलर्ट, पूजा विधि और मंत्र

व्रत की याद + पूजा विधि पाएं