मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

Mokshada Ekadashi Vrat Katha

भगवान श्रीकृष्ण (गीतोपदेशक) मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी
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संक्षिप्त उत्तर

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष में आती है। "मोक्षदा" अर्थात् मोक्ष देने वाली — यह एकादशी जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्रदान करती है। इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था, इसलिए यह गीता जयन्ती भी है। गीता पाठ और विष्णु पूजा इस दिन अत्यंत फलदायी है।

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा — संपूर्ण कथा

ब्रह्म वैवर्त पुराण में वर्णित है कि चम्पक नगर में वैखानस नामक एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। वे अत्यंत न्यायप्रिय और प्रजावत्सल शासक थे। उनके राज्य में सभी प्रजाजन सुखी थे। राजा वैखानस भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे और नित्य पूजा-अर्चना किया करते थे।

एक रात्रि राजा वैखानस को स्वप्न आया कि उनके पिता यमलोक में अत्यंत कष्ट भोग रहे हैं। पिता ने स्वप्न में कहा — "हे पुत्र! मैं अपने किसी पूर्वजन्म के पाप कर्म के कारण यमलोक में फँसा हूँ। कृपया कोई उपाय करो जिससे मुझे मोक्ष प्राप्त हो।" राजा प्रातः उठकर अत्यंत व्याकुल हुए।

राजा वैखानस ने अपने राज्य के विद्वान ब्राह्मणों और ऋषियों को बुलाकर अपनी समस्या बताई। किन्तु कोई भी उपाय नहीं सुझा सका। तब राजा ने वन में जाकर तपस्वी ऋषि-मुनियों से मिलने का निर्णय किया। वन में उन्हें परम तपस्वी और ज्ञानी ऋषि पर्वत मुनि मिले।

राजा ने ऋषि पर्वत मुनि को प्रणाम कर अपनी व्यथा सुनाई। ऋषि ने ध्यान लगाकर देखा और कहा — "हे राजन्! तुम्हारे पिता ने पूर्वजन्म में एक ब्राह्मण के साथ अन्याय किया था, जिसके फलस्वरूप वे यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। किन्तु चिन्ता मत करो, इसका समाधान है।"

ऋषि पर्वत मुनि ने कहा — "हे राजन्! मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम मोक्षदा एकादशी है। यह एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली है। तुम इस एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करो और व्रत का पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दो। इसके प्रभाव से तुम्हारे पिता को यमलोक से मुक्ति मिल जाएगी।"

राजा वैखानस ने ऋषि की आज्ञानुसार पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा। भगवान विष्णु की विशेष पूजा की, रात्रि जागरण किया और द्वादशी को ब्राह्मण भोजन कराया। व्रत का सम्पूर्ण पुण्य अपने दिवंगत पिता को अर्पित कर दिया।

व्रत के प्रताप से राजा के पिता तत्काल यमलोक के बन्धन से मुक्त हो गए। आकाश में दिव्य विमान प्रकट हुआ और राजा के पिता ने उसमें बैठकर पुत्र को आशीर्वाद दिया — "हे पुत्र! मोक्षदा एकादशी के पुण्य से मुझे मोक्ष प्राप्त हो गया है। तुम्हारा कल्याण हो!" राजा की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा।

इस एकादशी की अपार महिमा और भी है — इसी मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को द्वापर युग में कुरुक्षेत्र के रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश दिया था। इसीलिए इस तिथि को गीता जयन्ती के रूप में मनाया जाता है। गीता में भगवान ने स्वयं कहा है — "मासानां मार्गशीर्षोऽहम्" — माहों में मैं मार्गशीर्ष हूँ।

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा — "हे धर्मराज! मोक्षदा एकादशी का व्रत करने वाले को मोक्ष प्राप्त होता है — यही इसका नाम है। इस दिन गीता का पाठ करने से मनुष्य जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। जो मनुष्य इस दिन भगवद्गीता का श्रवण, पठन या दान करता है, उसे अनन्त पुण्य प्राप्त होता है।"

इस प्रकार मोक्षदा एकादशी दोहरे महत्व की तिथि है — एक ओर यह मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी है, दूसरी ओर यह गीता जयन्ती है। इस दिन भगवद्गीता का सम्पूर्ण पाठ, विष्णु सहस्रनाम, और एकादशी व्रत — ये तीनों मिलकर मनुष्य को परम कल्याण की प्राप्ति कराते हैं। यह कथा सुनने वाला भी मोक्ष का भागी होता है।

संदर्भ: ब्रह्म वैवर्त पुराण में राजा वैखानस की कथा के माध्यम से मोक्षदा एकादशी का माहात्म्य वर्णित है। गीता जयन्ती का आधार महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता है। भगवान कृष्ण ने स्वयं गीता (10.35) में मार्गशीर्ष माह की महिमा बताई है।

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ऑडियो कथा सुनें

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष को भगवान श्रीकृष्ण (गीतोपदेशक) की पूजा कैसे करें?

1

प्रातः स्नान और संकल्प

ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें। "मोक्ष प्राप्ति और भगवान श्रीकृष्ण की प्रसन्नता हेतु मोक्षदा एकादशी का व्रत रखता/रखती हूँ" — ऐसा संकल्प लें। गीता जयन्ती का भी स्मरण करें।

2

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण (गीतोपदेश मुद्रा) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पंचामृत स्नान कराएं। पीतांबर पहनाएं, तुलसी दल और पुष्प चढ़ाएं। मोरपंख और बाँसुरी भी रखें।

3

श्रीमद्भगवद्गीता पाठ

इस एकादशी पर सम्पूर्ण भगवद्गीता का पाठ करें। यदि सम्पूर्ण पाठ सम्भव न हो तो गीता के किसी एक अध्याय (विशेषकर अध्याय 2, 12, 15 या 18) का पाठ अवश्य करें। गीता माहात्म्य भी पढ़ें।

4

मंत्र जाप

भगवान कृष्ण के मूल मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का 108 बार जाप करें। गीता के श्लोक "कर्मण्येवाधिकारस्ते..." का भी पाठ करें।

5

रात्रि जागरण और गीता चर्चा

सायंकाल मोक्षदा एकादशी की कथा सुनें। रात्रि में गीता प्रवचन, भगवान कृष्ण के भजन और कीर्तन करें। गीता के ज्ञान पर चर्चा करें।

6

पारण और गीता दान

द्वादशी को प्रातः भगवान की पूजा करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं। श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तक का दान करें — यह इस एकादशी का सर्वश्रेष्ठ दान है। फिर पारण करें।

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा में क्या सामग्री चाहिए?

भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा (गीतोपदेश मुद्रा) श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तक तुलसी दल और पीले पुष्प पंचामृत और गंगाजल पीतांबर वस्त्र, मोरपंख चन्दन, कुमकुम, अक्षत धूप, घी का दीपक, कपूर फल, मिठाई (माखनमिश्री) नारियल और सुपारी तुलसी की माला

📿 मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

सर्वव्यापी भगवान श्रीकृष्ण (वासुदेव पुत्र) को मेरा नमस्कार है। गीता में भगवान ने स्वयं को वासुदेव कहा है — यह मंत्र मोक्ष प्रदायक है।

📿 अन्य मंत्र

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥

ॐ पार्थाय प्रतिबोधितां भगवता नारायणेन स्वयम्

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा के नियम

  • दशमी को सात्विक और हल्का भोजन करें
  • एकादशी को फलाहार या निर्जल व्रत रखें
  • श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ इस दिन अनिवार्य रूप से करें — यह गीता जयन्ती है
  • भगवान कृष्ण का ध्यान और मंत्र जाप करें
  • सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • रात्रि जागरण और गीता चर्चा करें
  • द्वादशी को गीता की पुस्तक दान करना विशेष पुण्यदायी है

✅ क्या खाएं

  • फल — केला, सेब, अनार, पपीता, अंगूर
  • साबूदाना खिचड़ी या खीर
  • सिंघाड़े और कुट्टू का आटा
  • मखाने, बादाम और अखरोट
  • दूध, दही, पनीर
  • शकरकंद और आलू
  • नारियल पानी और फलों का रस

❌ क्या न खाएं

  • चावल — एकादशी पर पूर्णतः वर्जित
  • गेहूँ, जौ और अन्य अनाज
  • दालें और राजमा
  • प्याज, लहसुन और तामसिक मसाले
  • माँसाहार, मदिरा, तम्बाकू
  • बासी और दूषित भोजन
  • अत्यधिक नमक और तैलीय पदार्थ

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा के लाभ

  • मोक्ष (जन्म-मरण से मुक्ति) की प्राप्ति होती है
  • पितरों का यमलोक से उद्धार होता है
  • गीता पाठ से अज्ञान का नाश और ज्ञान की प्राप्ति होती है
  • समस्त पापों का क्षय होता है
  • भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है
  • मन को शान्ति और आत्मज्ञान प्राप्त होता है
  • गीता दान से अनन्त पुण्य मिलता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोक्षदा एकादशी और गीता जयन्ती एक ही दिन क्यों हैं?

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को ही भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। चूँकि यह तिथि मोक्ष का ज्ञान देने वाली है, इसलिए इसे मोक्षदा एकादशी कहते हैं और गीता जयन्ती भी इसी दिन मनाई जाती है।

इस दिन गीता का कौन सा अध्याय पढ़ना सबसे उत्तम है?

सम्पूर्ण गीता का पाठ सर्वोत्तम है। यदि सम्भव न हो तो अध्याय 2 (सांख्य योग — आत्मा का ज्ञान), अध्याय 12 (भक्ति योग), अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग) या अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग) का पाठ करें।

"मोक्षदा" नाम का क्या अर्थ है?

"मोक्ष" अर्थात् जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति और "दा" अर्थात् देने वाली। मोक्षदा एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी है। राजा वैखानस की कथा में उनके पिता को इसी एकादशी से मोक्ष प्राप्त हुआ।

क्या इस एकादशी पर गीता दान करना चाहिए?

हाँ, गीता जयन्ती पर श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तक का दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। जो मनुष्य इस दिन गीता का दान करता है, उसे गीता-ज्ञान का अनन्त पुण्य प्राप्त होता है।

गीता में भगवान ने मार्गशीर्ष माह के बारे में क्या कहा है?

भगवद्गीता के अध्याय 10, श्लोक 35 में भगवान कृष्ण कहते हैं — "मासानां मार्गशीर्षोऽहम्" अर्थात् "महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ।" यह माह भगवान को सबसे प्रिय है और इसी माह में गीता जयन्ती आती है।

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