24 एकादशी व्रत कथा संग्रह

पौष पुत्रदा से सफला एकादशी तक — वर्ष भर की सभी 24 एकादशी की संपूर्ण कथा, पूजा विधि, सामग्री और मंत्र। हिंदी में, ऑडियो के साथ।

24 एकादशी कथाएं

एकादशी क्या है? — एकादशी हिंदू पंचांग की ग्यारहवीं तिथि है, जो हर माह में दो बार आती है — शुक्ल पक्ष (चंद्रमा बढ़ते समय) और कृष्ण पक्ष (चंद्रमा घटते समय)। यह भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पवित्र व्रत है। एक वर्ष में 24 एकादशी आती हैं। प्रत्येक एकादशी की अपनी विशेष कथा, महात्म्य और पूजा विधि है।

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पौष (Pausha)

माघ (Magha)

फाल्गुन (Phalguna)

चैत्र (Chaitra)

वैशाख (Vaishakha)

ज्येष्ठ (Jyeshtha)

आषाढ़ (Ashadha)

श्रावण (Shravana)

भाद्रपद (Bhadrapada)

आश्विन (Ashvina)

कार्तिक (Kartika)

मार्गशीर्ष (Margashirsha)

एकादशी व्रत क्यों रखें?

एकादशी व्रत का वर्णन पद्म पुराण, भविष्य पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में विस्तार से मिलता है। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि एकादशी व्रत से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आधुनिक विज्ञान भी पुष्टि करता है कि हर 15 दिन में एक दिन का उपवास (intermittent fasting) शरीर को detox करता है, insulin sensitivity सुधारता है, और पाचन तंत्र को विश्राम देता है। (de Cabo & Mattson, NEJM 2019)

एकादशी चंद्र पक्ष की 11वीं तिथि पर आती है — पूर्णिमा या अमावस्या से लगभग 3 दिन पहले — जब चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव बदलता है। इस दिन हल्का भोजन शरीर के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।

एकादशी व्रत — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकादशी क्या है?

एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दो बार आने वाली ग्यारहवीं तिथि है — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। यह भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है।

एक साल में कितनी एकादशी आती हैं?

एक वर्ष में 24 एकादशी आती हैं — प्रत्येक माह में 2 (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष)। कभी-कभी अधिक मास में अतिरिक्त एकादशी भी होती है।

सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन सी है?

निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल) सबसे कठिन और पुण्यदायी मानी जाती है — इसमें जल भी वर्जित है। देवशयनी और देवउत्थान एकादशी भी विशेष महत्व रखती हैं।

एकादशी का व्रत कैसे रखें?

दशमी की रात से भोजन बंद करें। एकादशी के दिन फलाहार या निर्जला व्रत रखें। भगवान विष्णु की पूजा करें, कथा पढ़ें। द्वादशी को पारण समय पर व्रत खोलें।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

पद्म पुराण के अनुसार एकादशी तिथि में अन्न में पाप का वास होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से, चावल उच्च glycemic index वाला भोजन है जो उपवास के लाभ को कम करता है।

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